माओवाद के खात्मे के बाद पहली बार सुकमा पहुंचे सीएम, सरेंडर कर चुके नक्सलियों से मिले, 25 हितग्राहियों को सौंपी घर की चाबी

RAIPUR KI BAAT
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सुकमा: नक्सलवाद से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। सशस्त्र माओवाद के खात्मे की घोषणा के बाद सीएम विष्णुदेव साय सोमवार को सुकमा जिला पहुंचे। सीएम ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित नक्सलियों के पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने सरेंडर कर चुके पूर्व नक्सलियों से बातचीत की और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


सरेंडर करने वालों के चेहरों में आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है।

2392 नक्सलियों ने छोड़ा माओवाद

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
  • नक्सलवाद के समाप्ति की घोषणा के बाद सुकमा पहुंचे सीएम
  • पुनर्वास केंद्र का किया दौरा, सरेंडर करने वालों से की चर्चा
  • सीएम ने कहा- लक्ष्य केवल पुनर्वास नहीं, अवसर देना भी है
  • हितग्राहियों को सीएम ने सौंपी आवास की चाबी

आत्मनिर्भरता नहीं नई मिसाल

सीएम ने कहा कि 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी दिया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।

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